इनकम टैक्स रिफंड अपडेट: 95% रिफंड हो चुके हैं प्रोसेस, सिर्फ कुछ मामलों में देरी—जानिए असली वजह

इनकम टैक्स रिफंड को लेकर चिंतित टैक्सपेयर्स के लिए राहत की खबर है। आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में 95% से ज्यादा रिफंड मामलों की प्रोसेसिंग पूरी हो चुकी है। केवल कुछ चुनिंदा केस ही फिलहाल रोके गए हैं, जिनमें अतिरिक्त जांच की जरूरत है।

सीबीडीटी (CBDT) के अनुसार, रिफंड में आई कमी का मतलब यह नहीं है कि विभाग ने टैक्सपेयर्स का पैसा रोका हुआ है। इसके पीछे टैक्स सिस्टम में हुए बदलाव और नई टैक्स रीजीम की बढ़ती लोकप्रियता बड़ी वजह हैं।


पिछले साल की तुलना में रिफंड कम क्यों हुआ

11 जनवरी तक कुल इनकम टैक्स रिफंड ₹3.11 लाख करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹3.75 लाख करोड़ से लगभग 17% कम है।

वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह कमी प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि टैक्स कटौती के बेहतर सिस्टम का नतीजा है, जिससे अतिरिक्त टैक्स कटने के मामले घटे हैं।


कुछ रिफंड अभी क्यों अटके हैं

इनकम टैक्स विभाग अब ऑटोमेटेड डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल कर रहा है। इस प्रक्रिया में कुछ रिटर्न्स में इनकम, टीडीएस या अन्य डिटेल्स में मिसमैच पाया गया।

ऐसे मामलों में रिफंड जारी करने से पहले टैक्सपेयर्स को रिटर्न सुधारने या अतिरिक्त जानकारी देने को कहा गया। विभाग ने इसके लिए विशेष कैंपेन भी चलाया, जिससे पिछले दो वर्षों में ₹9,640 करोड़ का अतिरिक्त टैक्स कलेक्शन हुआ।


एनालिटिक्स आधारित जांच से बदली प्रक्रिया

पहले जहां रिफंड जल्दी जारी हो जाते थे, अब डेटा मैचिंग के बाद ही भुगतान किया जाता है। अधिकारियों के अनुसार, जिन मामलों में आगे की जांच जरूरी है, केवल उन्हीं को रोका गया है।

इससे यह सुनिश्चित होता है कि गलत जानकारी के आधार पर रिफंड जारी न हो।


TDS नियमों में बदलाव से भी घटा रिफंड

सरकार ने बीते कुछ वर्षों में TDS नियमों को ज्यादा तर्कसंगत बनाया है। इससे साल के दौरान जरूरत से ज्यादा टैक्स कटने की समस्या कम हुई है।

जब टैक्स सही मात्रा में कटता है, तो रिटर्न फाइल करने के बाद रिफंड की जरूरत भी नहीं पड़ती।


नई टैक्स रीजीम की ओर बढ़ता रुझान

आईटीआर-1 से आईटीआर-4 फाइल करने वाले करीब 88% टैक्सपेयर्स ने नई टैक्स रीजीम चुनी है। इसमें डिडक्शन और एग्जेम्प्शन नहीं मिलते, लेकिन टैक्स स्लैब कम और प्रोसेस आसान है।

ओल्ड रीजीम में ज्यादा डिडक्शन होने के कारण रिफंड की संभावना अधिक रहती थी, जबकि नई रीजीम में टैक्स पहले से ही संतुलित रहता है।


रिफंड रोका नहीं गया, सिर्फ जांच के बाद जारी हो रहा है

आयकर विभाग का साफ कहना है कि रिफंड प्रोसेस में कोई रुकावट नहीं है। अधिकांश टैक्सपेयर्स को उनका पैसा मिल चुका है, और जिनका रिफंड रुका है, वह सिर्फ तकनीकी या जांच से जुड़े कारणों की वजह से है।

रिटर्न में दी गई जानकारी सही होने पर रिफंड अपने आप जारी हो जाएगा।