Health Insurance- इंश्योरेंस कंपनी क्लैम देने से मना कर दें, तो क्या करें
- byJitendra
- 18 Jun, 2026
दोस्तो कोरोना के पाद लोगो के बीच हेल्थ इंश्योरेंस में बढ़ोत्तरी हुई हैं, इसी के साथ लोग महंगे मेडिकल इलाज से खुद को बचाने के लिए हेल्थ कवरेज में निवेश कर रहे हैं। पॉलिसीहोल्डर्स के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में से एक इंश्योरेंस क्लेम का रिजेक्ट होना है। जिसको रोकने के लिए IRDAI ने नए नियम बनाए हैं, आइए जानते हैं इनके बारे में-

नए नियम क्यों लागू किए गए?
2025 में इंश्योरेंस कंपनियों ने हर बारह में से लगभग एक हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम को रिजेक्ट किया। पहले किए गए सुधारों के बावजूद क्लेम सेटलमेंट से जुड़ी शिकायतें बढ़ रही हैं, जिसके कारण रेगुलेटर को सख्त कदम उठाने पड़े।
IRDAI द्वारा घोषित मुख्य बदलाव
इंश्योरेंस कंपनियों को रिजेक्शन का स्पष्ट कारण बताना होगा
अगर हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम को नामंजूर किया जाता है, तो अब इंश्योरर को रिजेक्शन के पीछे का कारण स्पष्ट रूप से बताना होगा।
पॉलिसी की शर्तें बतानी होंगी
इंश्योरेंस कंपनियों को पॉलिसी की उन सटीक शर्तों और नियमों का भी उल्लेख करना होगा जिनके आधार पर रिजेक्शन का फैसला लिया गया। इससे अस्पष्ट स्पष्टीकरण से बचा जा सकेगा और जवाबदेही बढ़ेगी।

पॉलिसीहोल्डर्स के लिए अधिक पारदर्शिता
नए नियमों का उद्देश्य ग्राहकों को यह बेहतर ढंग से समझने में मदद करना है कि उनके क्लेम क्यों मंजूर नहीं किए गए, जिससे भ्रम और विवाद कम होंगे।
शिकायत दर्ज करने का अधिकार
जिन पॉलिसीहोल्डर्स को लगता है कि उनका क्लेम गलत तरीके से रिजेक्ट किया गया है, वे IRDAI से संपर्क कर सकते हैं और इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
बेहतर उपभोक्ता सुरक्षा की दिशा में एक कदम
रेगुलेटर ने कहा कि ये सुधार क्लेम सेटलमेंट प्रक्रिया को बेहतर बनाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं। क्लेम रिजेक्शन से जुड़ी शिकायतों के लगातार बढ़ने के साथ, IRDAI को उम्मीद है कि नए नियम हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में अधिक पारदर्शिता, निष्पक्षता और भरोसा सुनिश्चित करेंगे।




